Friday, 16 May 2008

नई कमीज

मैं नई कमीज पहन
तुम्‍हें खत लिख रहा हूं
किस तरह महसूस कर रही है
वह मेरे शरीर से बातें करती
अभी थोडी देर पहले
पसीने से मिली थी
अभी थोडी देर बाद
धूल को मिलेगी
कैसा लगेगा उसे
साबुन से मिलना
मेरी पत्‍नी के हाथों धोए जाना
नई कमीज चमकती धूप में
तार पर लटकती
सूखती, क्‍या सोचेगी
मैं तुम्‍हें खत लिख रहा हूं
नई कमीज पहन कर।
-गुरप्रीत

6 comments:

अमिताभ फौजदार said...

अभी थोडी देर पहले
पसीने से मिली थी
अभी थोडी देर बाद
धूल को मिलेगी
कैसा लगेगा उसे
साबुन से मिलना

very nice !!

सागर नाहर said...

मोहनजी
हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, आप हिन्दी में बढ़िया लिखें और खूब लिखें यही उम्मीद है।
एक अनुरोध है कृपया यह वर्ड वेरिफिकेशन का टंटा हटा दें, यह टिप्पणी करते समय बड़ा परेशान करता है।

॥दस्तक॥
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल

शोभा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई स्वीकारें।

मोहन वशिष्‍ठ said...

आप सभी को बहुत बहुत धन्‍यवाद और मैं आशा करता हूं आप सभी के आर्शिवाद से मैं इस ब्‍लाग पर बहुत कुछ लिखूंगा

monika said...
This comment has been removed by a blog administrator.
seema gupta said...

मैं तुम्�हें खत लिख रहा हूं
नई कमीज पहन कर।
" wonderful,so soft touch of feelings , good"