Friday, 16 May 2008

दर्पण

दर्पण एक सच्‍चा दोस्‍त
जो बताता है मेरी
सच्‍चाई को
मेरी बुराई को
और मैं उससे
करता हूं अपने
दिल के हर
दुख दर्द को सांझा
क्‍योंकि एक वो ही तो है
जो ना मेरे दुखों पर मेरा
मजाक बनाता है
और मेरे खुश होने पर
बहुत खुश होता है

3 comments:

vijaymaudgill said...

ज्यादा बातें न करता हुआ। सिर्फ़ इतना ही कहूंगा कि बहुत बढ़िया है। बाक़ी तुम समझ जाओगे।
शुभकामनाएं आगे लिखने के लिए

seema gupta said...

दिल के हर
दुख दर्द को सांझा
क्‍योंकि एक वो ही तो है
जो ना मेरे दुखों पर मेरा
मजाक बनाता है
"ya its a great truth of life, only miirror can show us our real face and understand each and every mood of ours,beautifulpresentation"

Regards

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

सच बात!