Tuesday, 24 June 2008

वह आदमी

कफन में लिपटा
वह आदमी
जो कभी भी
किसी को
दुख नहीं देता था
आज चला गया अकेला
चुप बिल्‍कुल चुप
इस जग से
तोड कर तमाम
रिश्‍तों नातों को
छोड गया तन्‍हा
अपने परायों को
आज दे गया इतना
दुख भला कैसे
ये तो वही आदमी था
जो कभी भी
किसी को
दुख नहीं देता था
कफन में लिपटा
वह आदमी

3 comments:

Udan Tashtari said...

यही जीवन चक्र है मित्र. अच्छे भाव लगे.

अल्पना वर्मा said...

mrityu ek staya hai jise hum sabhi jhuthlate hain..
bhaavpuran rachna..

seema gupta said...

जो कभी भी
किसी को
दुख नहीं देता था
कफन में लिपटा
वह आदमी
"wah so touching"

Regards