Sunday, 19 April 2009

हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो

हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो
कितने ही अफसाने कहते हो
होता है मीठा सा अहसास
उन तानों में भी जो तुम देते हो

विरह वेदना से हो पीडित
याद मुझे तुम करते हो
जब भी ताने तुम देते थे
अब भी ताने तुम देते हो
हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो

क्या तुम्हें नहीं पता दूरी बढाती है प्यार
विरहनी बनी थी मीरा
राधा ने भी रस चखा
चखकर तुम भी रस विरह का
ताने हजार देते हो
हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो

इस विरह में तुम्हारे
दिन तो गुजर जाता है
आते आते शाम और फिर रात के
ये दिल पगला सा जाता है
और कोसता हूं इस विरह को मैं भी
जिसमें ताने तुम देते हो
हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो

13 comments:

अल्पना वर्मा said...

विरह वेदना की बखूबी अभिव्यक्ति की है मोहन जी आप ने अपनी इस कविता में.
बहुत सुन्दर.

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति हुई है ... अच्‍छी रचना।

vijaymaudgill said...

kya kahu ab main apko, yaar dinodin paripakav hote ja rahe hain aap. maza ata hai apko padhkar

Anil Pusadkar said...

बहुत खूब मोहन जी।

urmi said...

मोहन जी

आपकी कविता पढ के दिल खुशी से झुम उठा ! इतना सुन्दर लिखा है आपने कि मै शब्दो मे बयान नही कर सकती !

माशाल्लाह लाजवाब है !

उर्मि

Udan Tashtari said...

इस विरह में तुम्‍हारे
दिन तो गुजर जाता है
आते आते शाम और फिर रात के
ये दिल पगला सा जाता है
और कोसता हूं इस विरह को मैं भी
जिसमें ताने तुम देते हो
हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो


--क्या बात है मोहन भाई-बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!!

गर्दूं-गाफिल said...

सुंदर अभिव्‍यक्ति

डॉ .अनुराग said...

कभी कभी विरह भी प्रेम की उर्जा को बनाये रखने के लिए जरूरी होती है .

Harkirat Haqeer said...

इस विरह में तुम्हारे
दिन तो गुजर जाता है
आते आते शाम और फिर रात के
ये दिल पगला सा जाता है

वाह जी मोहन जी ...क्या खूब बाँधा है शब्दों को.....!!

Jyotsna Pandey said...

यह भी प्रेम का एक रंग है जिसके बिना प्रेम अधूरा है ,बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....
मेरी शुभकामनाएं ........

महामंत्री - तस्लीम said...

मोहन भाई, कोई नाराजगी है क्‍या।

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मॉं की गरिमा का सवाल है
प्रकाश का रहस्‍य खोजने वाला वैज्ञानिक

Vijay Kumar Sappatti said...

mohan ji
namaskar

main kya kahun teen bhaar padh chuka hoon aapki kavita , man khin ruk chuka hai , kuch uljh gaya hai .. aankhe ko kone bheege hue hai ..

bhaiyya , aapki lekhni ko salaam bus aur kuch nahi kahunga ..



vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com

Babli said...

आप इतना सुंदर लिखते है कि आपकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है! लिखते रहिये और हम पड़ने का लुत्फ़ लेंगे!