Wednesday, 1 April 2009

बिसरी यादें मूर्ख दिवस की

बात आज से ठीक पांच साल पहले की है। मेरी शादी के ठीक 20 दिन बाद मूर्ख दिवस यानी आज का दिन आ जाता है। हांलांकि कभी इस दिवस को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन उस बार जो मूर्ख बनाया कि आज तक इस बात को याद कर मेरी श्रीमती जी अभी भी हंसते हंसते लोट पोट हो जाती है। हुआ यूं कि 1 अप्रेल को मैंने सुबह सुबह बोल दिया कि चलो आज दीदी के घर चलते हैं। दीदी मेरे घर से करीब 35 किलोमीटर दूर हैं। तो श्रीमती जी बहुत खुश हो गईं। और थैंक्‍यू कहते हुए तैयार होने के लिए चली गई। बाद में उन्‍हें ऐसा आभास हुआ कि कहीं कुछ गडबड है तो उन्‍होंने सोचा कि ये कभी कोई काम घरवालों से बिना पूछे नहीं करते तो क्‍यों ना घरवालों से खासकर मम्‍मी से पूछ लेती हूं। वह तुरंत मम्‍मी के पास जाकर बोली कि क्‍या हम सच में ही जा रहे हैं। मम्‍मी ने बोला कहां जा रहे हो। तो मम्‍मी बोली कि मुझे तो पता नहीं। अब यह बात मैंने बाकी तो सब से कर ली थी लेकिन मम्‍मी से नहीं कर पाया। बीच में आकर बडे भईया बोले कि हां मेरे से बोल रहा था चले जाओ लेकिन शाम को जल्‍दी आ जाना। अब श्रीमती के पैर तो आसमान में। क्‍योंकि दीदी से बहुत पटती है उसकी और दीदी भी कई बार बोल चुकी थी सो बहुत खुश थी। अब बोलने लगी मैं क्‍या पहन कर चलूं तो मैंने कहा कि कोई अच्‍छी सी साडी पहन लो लंगहा चुन्‍नी पहन लो तो खुद ही बीच में बोल उठीं कि लांचा पहन लूं। मैंने कहा कि यार नहीं लांचा नहीं। तो उन्‍होंने मम्‍मी से जाकर सिफारिश लगा दी। और मम्‍मी ने बोल दिया तो मेरी क्‍या मजाल कि मैं मना कर दूं। तैयार हुए अच्‍छे से एक डेढ घंटा लगाकर। फिर घर से चले और जाकर सडक वाले पुराने घर पर बिठा दिया। बोली क्‍या हुआ। मैंने कहा हो गया अप्रेल फूल।
पहले तो काफी देर तक वह रोती रही फिर मेरे से घर ना जाने की जिद करने लगी बोली कि अब मैं शाम होने से पहले घर नहीं जाऊंगी। अभी कुछ खाया भी नहीं था बेचारी मूर्ख बनायी सो लभाब में। अब मूर्ख बनाया हे तो मूर्ख को निभाना भी हमें ही है। फिर उनके लिए खाने पीने का इंतजाम किया और वहीं दोपहर में पुराने घर में सो गए। हुई शाम तो उन्‍हें लेकर घर गए। घर पर हंसी खुशी का माहौल देखते ही बनता था। उस दिन वो अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकली किसी के सामने। सच में बहुत ही अच्‍छा खुशी भरा दिन था वो यादगार दिन। लेकिन अब शायद पता नहीं कब ऐसा दिन आएगा।

23 comments:

आशीष कुमार 'अंशु' said...

देर से सही पर शादी की सालगिरह कबूल करें

"अर्श" said...

shaadi ki saalgirah mubaarak sahib... murkhata diwas pe ye baat bahot khub rahi.... bahot dino se aapke darshan nahi huye the...


arsh

Udan Tashtari said...

बीस दिन देर से शादी की सालगिरह की बधाई ले लो और हर दिन ऐसे ही खुशियाँ बिखरें, इस हेतु शुभकामनाऐं.

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

देर से शुभकामनाएं देने वालों की जमात में हमें भी शामिल समझिए.. बधाई..

mehek said...

belated happy marraige annerversery

नीरज गोस्वामी said...

ये मधुर यादें ही जीवन की अमूल्य धरोहर होती हैं...शुक्रिया हमसे बांटने के लिए...
नीरज

ताऊ रामपुरिया said...

देर से ही सही पर शादी की घणी बधाई आपको.

रामराम.

डॉ .अनुराग said...

आज ही सही.....अभी डिनर का टाइम बाकी है

bhootnath( भूतनाथ) said...

भगवान् ना करे ऐसा दिन दुबारा भी आये....क्यूंकि अबकी जो कुट्टी हुई तो फिर ना होने को....बाई दी वे....आप क्यूँ समझते हो की आपकी शादी के बीस दिन बाद पहली अप्रैल आई थी....वो तो शादी वाले दिन से ही आना शुरू हो चुकी थी....यूँ कि बस आने में कुछ लेट हो गयी....!!

Mumukshh Ki Rachanain said...

भाई वशिष्ठ जी,

सर्व प्रथम विवाह की साल गिरह पर देर से ही सही बधाई तो ग्रहण करें.
एक अप्रैल के बहाने ही सही, एक मधुर याद साझा करने का आभार.

चन्द्र मोहन गुप्त

डॉ. मनोज मिश्र said...

वाकई सुनहरी यादें हैं .

Science Bloggers Association said...

एक जमाना था जब हम सब कितने शौक से एक दूसरे को मूर्ख बनाया करते थे।

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तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

अमिताभ श्रीवास्तव said...

pahli baar aaya aapke blog par,
achcha laga..

MOHAN KA MAN....
ujjval he...

अल्पना वर्मा said...

हा !हा !हा! यह भी खूब रही!
आप भी खूब मजाक कर लेते हैं..लेकिन ऐसे ही एक यादगार दिन बन गया!
आप ने यह संस्मरण हम से बांटा ..इस के लिए धन्यवाद.
[आप का लेख फीड के ज़रीयेही पढ़ पा रही हूँ.]

[15 march ko thi aap ki marriage aniversary..us ki dher sari badhayee]

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर लगा आप का यह मजाक, यार कोई फ़िल्म ही देख लेते उस दिन...या फ़िर दीदी के घर सचमुच ही ले जाते.... वेसे निकले पक्के पंडित जी.राम राम जी की

मोहन वशिष्‍ठ said...

alpna ji meri aniversery 15 ko nahi balki Bhatia Ji se ek din pahale yani 10 march ko hoti hai
aap sabhi ka mera utsahvardhan karne ke liye bahut bahut dhanywad

अल्पना वर्मा said...

okay Mohan ji...chaleeye is tarah sahi tareekh maluum ho gayi..:)

Praney ! said...

Nice one.


I hope you didn't creat that scene only for lil privery :). BTW if you had to take her to lunch and all it seems after all it was she who hit you on April Fool. LOL

योगेन्द्र मौदगिल said...

१० मार्च तो बताया
पर सन नहीं बताया>>

क्यों रे मोहन..
अब अपने किये पर
काहे मूंह छिपाते हो
सन
(बेटे का नाम)
क्यों नहीं बताते हो..?

lovish said...

मौदगिल जी नमस्‍कार
वाह जी वाह क्‍या बात है ऐसा कुछ नहीं है कि मैं कुछ छिपाऊं क्‍योंकि मैंने पहली ही लाईन में बोला कि बात आज से ठीक पांच साल पहले की है तो इसका मतलब हुआ बात 2004 की चल रही है तो मेरी शादी 10 मार्च 2004 को हुई अब बात आपने की है सन की तो सन एक तो हो गया साल दूसरा सन कह सकते हैं पुत्र तो ये भी बात क्लियर करूं कि बडी बेटी का जन्‍मदिन अभी अभी 31 मार्च को आया है जो कि अब चार साल की होकर पांचवे में प्रवेश कर चुकी है और अब बात करें पुत्र या कहें सुपुत्र तो वह सन 2007 की दीवाली वाले दिन यानि 9 नवंबर के दिन आया और अब आप लगा लो कि कितने साल का हो गया है और हां अब ये भी मत बोलना कि मैंने कुछ छिपाया है दूसरे ब्‍लाग पर मेरे बेटे के फोटो भी आप सभी देख सकते हैं मेरा दूसरा ब्‍लाग सच http://mohanbaghola.blogspot.com है

rewa said...

Belated happy marraige annerversery! Aapke name se Vashishth rishi ki naam yaad aa gayi:-)

jeetu said...

are yar aap ki shadi ho gayi kya m to apni sister
se aapki shadi karwana chahta tha. but dont mind she is also my sister.

shama said...

Marathi me aisee yaden likhi hain...kabhi hindi me likh doongee!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://aajtakyahatak-thelightbyalonelyspot.com