Thursday, 9 April 2009

बीत गए बरसों




आज
कल
परसों
बीत गए बरसों
उनसे मिले हुए
जो अक्‍सर कहते थे
चलेंगे साथ उम्रभर
यूं ही डालकर
इक दूजे के
हाथों में हाथ

18 comments:

अनिल कान्त : said...

कम शब्द मगर बड़ी बात

परमजीत बाली said...

अपने मनोभावों को सुन्दर शब्द दिए है।बधाई।

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर कविता है। प्रायः जीवन में ऐसा ही होता है।
घुघूती बासूती

रंजना [रंजू भाटिया] said...

एक सच एक सुन्दर बात इस कविता के माध्यम से कही आपने ..बहुत अच्छी लगी

vijaymaudgill said...

rachna bahut hi badiya hai.

25 shabdo main 25 baras samet diye. bahut khoob.

अविनाश वाचस्पति said...

कोई कहीं नहीं गया है

सब मन में समाए हुए हैं

देख लें झांक कर मन में

हथेलियों की रेखाओं में

चिंताओं में जहां रहती है

सबकी चिंता बनके याद

बस कर ही नहीं सकते

फरियाद

पर करते हैं

करते रहेंगे
सदा याद।

seema gupta said...

बहुत सुन्दर कविता

regards

neeshoo said...

मोहन जी , बेहतरीन रचना । कम शब्दों में सिमटी हुई ।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत बेहतरीन रचना.

रामराम.

Harkirat Haqeer said...

25 ਸਾਲ....???

oye hoye.....ਮੋਹਨ ਜੀ ਬੜੇ ਬੇਆਬਰੂ ਹੋ ਕੇ ਨਿਕਲੇ ਤੇਰੇ ਕੂਚੇ ਸੇ ਹਮ......!!

डॉ. मनोज मिश्र said...

गहन भाव.

M.A.Sharma "सेहर" said...

कम शब्दों में बहुत कुछ कह गए ..
Wonderful lines !!!

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छी लगी आपकी यह रचना ...

mehek said...

bahut sunder

Babli said...

महेशजी
नमस्कार

बहुत बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी शायरी और साथ ही साथ मेरी बनायी हुई पेंटिंग पसन्द आयी! मै पूरी कोशिश करती हू कि मै आप सब् के जैसा उन्दा लिख सकू! मुझे उम्मीद है कि आप मुझे और उत्साह देगे ताकि मै और बेह्तर लिख सकू! जब भी समय मिलता है मै पैन्टिग करती हु और मुझे इसमे बहुत आनन्द मिलता है!

आप भी बहुत सुन्दर लिखते है और मुझे आप का ब्लोग बेहद पसन्द आया! आप के कमेन्ट क मुझे इन्तज़ार रहेगा! जब भी आपको वक्त मिले मेरे ब्लोग मे
तशरीफ़ लाइएगा !

शुभकामना के साथ!

उर्मि

hem pandey said...

सुन्दर.

shama said...

Mohanji,
itnee saaree tippaniyonke baad mai adnaa-see wyakti kya likh sakti hun..
Mere blogpe aayen..."ye kahan aa gaye ham" to samapan le gayee hai...aapke commentkee bohot izzat kartee hun...seekhne milta hai..ab shuru kee hai," koyn hota hai aisaa?"...Aabharee rahungee ki vishlekshanatmak tippanee den to...

mahendra verma said...

कविता कम शब्दों में बहुत कुछ कह रही है। साथ लगी पेंटिंग भी मनभावन है।