Tuesday, 1 September 2009

हो रही है बारिश झम -झमाझम

हो रही है बारिश झम- झमाझम
नाच रहे हैं पेड छम -छमाछम
बह रही है पवन सन -सनासन
हो रही है बारिश झम -झमाझम

नहीं निकला सूरज तम- तमाकर
छिप गया बादलों में दुम दबाकर
भर गया पानी लब- लबालब
हो रही है बारिश झम- झमाझम

गा रहे हैं पक्षी चह -चहाकर
मेंढक भी टर्राया टर- टराटर
पत्‍ते भी खिले चम -चमाकर
हो रही है बारिश झम- झमाझम

धरती भी हुई गीली तर- तरातर
बच्‍चों ने की मस्‍ती छम -छमाछम
आया सावन हर- हराहर
हो रही है बारिश झम- झमाझम

10 comments:

omsherryom said...

bhaiyaa..lagta hai aaj bhabhi ne pitai ki hai tham-thama0-tham...aur aansooo bahe hain jham-jhama-jham. aur yeh blog main ad itne laga diye hain ki dekhne ka mann nahin kart hai...padna to door ki baat....blog ki aatma ko mat jaane do

अनिल कान्त : said...

वाह भाई मजा आ गया बारिश की कविता पढ़कर

रंजना said...

Waah !! Bahut hi sundar geet...

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया.

Mrs. Asha Joglekar said...

Bahut maja aaya aapke zamzamazam barish ka.

hindustani said...

बहूत अच्छी रचना. कृपया मेरे ब्लॉग पैर पधारे

शरद कोकास said...

भई हमारे यहाँ तो अब टुकड़ों मे हो रही है फिर भी झमाझम का मजा तो आ ही गया -शरद कोकास दुर्ग छ.ग.

PREETI BARTHWAL said...

हो रही है बारिश झम-झमाझम।
बहुत बढ़िया।

अल्पना वर्मा said...

baarish khoob ho rahi hai,aisa lagta hai..
barsaat ke mausam ka achcha varnan kiya hai.

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत सुन्दर...मोहन जी, ताला टिप्पणीकार को कविता की अपनी पसंद की पंक्तियां कॉपी करके टिपण्णी में शामिल करने से रोकता है...वक़्त की कमी की वजह से किसी भी अंश को दोबारा लिखने में दिक्क़त का सामना करना पड़ता है...