Sunday, 9 May 2010

मां तुझे सलाम

सर्वप्रथम आप सभी को मांतृत्‍व दिवस की हार्दिक बधाईं इस उपलक्ष्‍य पर मैं मां के लिए दो शब्‍द आपके सामने प्रस्‍तुत करना चाह रहा हूं आशा है आप सबको पसंद आएंगे

मेरी मां
बूढी है मगर
अभी भी बच्‍चों के लिए
रखती है हौंसला
अपने 40 साल के बेटे को
गोद में उठाने की और
उसे वही लाड प्‍यार करने की
जो करती थी तब
जब वह खुद थी 40 साल की और
बेटा था कुछ ही साल का
मगर क्‍या हुआ
अभी भी उसकी बाजुओं में जान नहीं
लेकिन उसका ये निस्‍वार्थ प्‍यार
है ना उसके साथ

Sunday, 4 April 2010

प्यार खुदा की ही बन्दगी है

एक चिडिया को एक सफ़ेद गुलाब से प्यार हो गया , उसने गुलाब को प्रपोस किया ,
गुलाब ने जवाब दिया की जिस दिन मै लाल हो जाऊंगा उस दिन मै तुमसे प्यार करूँगा ,
जवाब सुनके चिडिया गुलाब के आस पास काँटों में लोटने लगी और उसके खून से गुलाब लाल हो गया,
ये देखके गुलाब ने भी उससे कहा की वो उससे प्यार करता है पर तब तक चिडिया मर चुकी थी


इसीलिए कहा गया है की सच्चे प्यार का कभी भी इम्तहान नहीं लेना चाहिए,
क्यूंकि सच्चा प्यार कभी इम्तहान का मोहताज नहीं होता है ,
ये वो फलसफा; है जो आँखों से बया होता है ,

ये जरूरी नहीं की तुम जिसे प्यार करो वो तुम्हे प्यार दे ,
बल्कि जरूरी ये है की जो तुम्हे प्यार करे तुम उसे जी भर कर प्यार दो,
फिर देखो ये दुनिया जन्नत सी लगेगी
प्यार खुदा की ही बन्दगी है

माफ़ करना दोस्तों बहुत दिनों से आपके पास आन की सोच रहा था की नई जॉब के कारण आपसे रूबरू न हो सका अब शायद जल्दी जल्दी आपसे रूबरू हो जाया करूँगा आज जो पोस्ट मैं आपको पढ़ा रहा हुन वों मैंने नहीं लिखी है वों किसी एक दोस्त के ऑरकुट से कॉपी कर आपको पढ़ा रहा हूँ लिखने वाले का नाम पता नहीं है अगर किसी ने लिखी हो तो मुझे बता सकता है मैं लेखक का नाम दाल दूंगा मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी  इसको पढ़ने का मेरा मकशाद केवल अच्छी लगी इसीलिए पढ़ा रहा हूँ जिस भी लेखक ने लिखी है उसको मेरी और से भी बधाई इतनी प्यारी और दिल को छू लेने वाली पोस्ट के लिए

Monday, 15 March 2010

बहुत दिन बाद वापसी दोस्त के लिए







तेरी दोस्ती है मेरे लिए
भगवन का नायब तोहफा
नजर न लगे किसी की इसे
जो मिला है ये नायब तोहफा
मिले हर जनम में
भाई की तरह तू
 है उपरवाले से येही दुआ
केशव तेरे लिए हैं शुभकामनायें मेरी
मिले मंजिल तुझे
पहुंचे कामयाबी-ए-शिखर पर
करो सीना गर्व से ऊँचा
अपने परिवार का



अब जल्द ही आप से मुलाकात करूँगा छोटे से ब्रेक के बाद

Wednesday, 3 February 2010

तुम जब याद आते हो

तुम जब याद आते हो
तो रुलाते हो
जब याद नहीं आते
तो सताते हो
आखिर क्यूँ
क्या यही होती है चाहत
क्या यही प्रेम कहलाता है
अगर है यही प्रेम
तो है कडवा मगर बड़ा प्यारा
खुसनसीब हैं वों जो पीते हैं इस प्याले को
हो जाते हैं अमर
कर जाते हैं अमर
जो पीते हैं इस प्याले को

Saturday, 30 January 2010

कुछ लोग जमाने में...


कुछ लोग जमाने में ऐसे भी तो होते हैं
दफ्तर में जो हंसते हैं घर जाके वो रोते हैं
बीवी की नजरों में अच्छे हैं वो शौहर
बच्चों के कपड़ों को, जो शौक से धोते हैं
रातभर बीवी की खिदमत में जुटते हैं
जाते ही वो दफ्तर में आराम से सोते हैं
कुर्सी पर लदे रहना, बस फितरत है इनकी
कुर्सी के ये खटमल, बेपैंदी के लौटे हैं
पंखों में परिंदों जैसी उड़ने की तमन्ना है
ये बात क्या समझेंगे जो पिंजरे के तोते हैं
सीने में हिमालय की कुल्फी के खजाने हैं
क्यों खवाब में चुस्की के पलकों को भिगोते हैं
ये लाइन maine http://gauravkumra84.blogspot.com/ is blog se li hain so koi bhi inhe anyatha na le

Sunday, 17 January 2010

आपका एक दोस्त

पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झूठ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो दूर हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं
..... आपका एक दोस्त

यह मैंने नहीं लिखी नेट पर घूमते हुए अचानक आँखों के सामने आ गयी और लगा की इसमें है कुछ बात जो दिल को छू गयी सो पोस्ट कर दी इसको मेरी लिखी हुयी न समझा जाए लेखक का नाम मुझे पता नहीं है अगर किसी को पता हो तो बता दें मैं उन सज्जन का नाम लगा दूंगा

Wednesday, 9 December 2009

खुशखबरी खुशखबरी खुशखबरी

सभी भाइयों के लिए एक खुश खबरी है अब जो भी शादीशुदा नहीं हैं खाशकर उन्ही के लिए क्यूंकि राखी सावंत ने इलेश को छोड़ दिया है तो अब सभी राखी के चाहने वाले खुश होकर जल्द राखी के होने वाले स्वन्वर में शामिल होने के लिए कमर कास लें
खुशखबरी  खुशखबरी  खुशखबरी  खुशखबरी  खुशखबरी  खुशखबरी  खुशखबरी

Thursday, 5 November 2009

पेट की खातिर या ठंड की खातिर

किसी काम से दिल्‍ली जा रहा था। रास्‍ते में आधी रात को एक स्‍टेशन पर गाडी रूकी। आंख खुल गई। तो बाहर जो नजारा देखा उसे आपके सामने प्रस्‍तुत कर रहा हूं।

सुबह सुबह की मीठी मीठी
कुनकुनी सी ठंड
तन पर नाम मात्र कपडे
कंपकपाता जिस्‍म
सिकुड रहा है
अपने आप में
हाथ पेट की खातिर
आ रहा है चिथडों से बाहर
कोई राही
दे दे उसे रहम
राही उतरा एक
काम किया नेक
उतार कंबल अपना
ओढाया उसे
अब हाथ अंदर चला गया कंबल के
पेट की खातिर नहीं
ठंड से बचने की खातिर

Tuesday, 20 October 2009

मतलब की दुनिया

उफ ये दुनिया ये मतलब की दुनिया
ये चेहरों पे चेहरे लगाती है दुनिया
ये भोले ये मासूम सुंदर से चेहरे
मगर दिल में इनके हैं काले अंधेरे
मतलब के रिश्‍ते बनाती है दुनिया
फिर तन्‍हा एक दिन छोड जाती है दुनिया
कभी दोस्‍त बनके हंसाती है दुनिया

कभी बनके दु‍श्‍मन रुलाती है दुनिया
कभी प्‍यार से लगाकर गले
पीछे से खंजर चुभोती है दुनिया
कभी खूबसूरत चेहरे पे न जाना
दिल देखकर फिर दिल को लगाना
इंसान को यही सिखाती है दुनिया
है दौलत यहां हर रिश्‍ते से ऊपर
दौलत के लिए अपनों का खून
बहाती है दुनिया
ऊफ ये दुनिया ये मतलब की दुनिया
-रजनी वशिष्‍ठ
(नोट - यह कविता मेरी पत्‍नी द्वारा लिखित है । )

Thursday, 15 October 2009

दीपावली की शुभकामनाएं

दीपावली पर्व की आप सभी को समस्‍त परिवार सहित हार्दिक शुभकामनाएं  वैभव लक्ष्‍मी आप सभी पर कृपा बरसाएं। लक्ष्‍मी माता अपना आर्शिवाद बरसाएं।

दूर कहीं गगन के तले 
एक दीप की लौ नजर आई 
जाकर पास देखा उसके 
दीपक जल रहा था 
बिना तेल के 
मैंने पूछा दीपक से 
तेल नहीं तो कैसे जल रहे हो तुम 
तो दीपक ने जवाब दिया 
कि 
जिस तरह तुम इंसान 
बिना तेल और बाती के 
एक दूसरे से जल रहे हो 
वैसे ही मैं भी 
तुम इंसानों को देख कर 
जल रहा हूं 

छोड कर आपस का वैर
चलो जलाते हैं हम भी प्‍यार का दीपक
प्रेम को बना दीपक की बाती
इंसानियत से लो तेल का काम
फैलेगा शांति का प्रकाश चारो ओर
होंगे खुशहाल सभी