Wednesday, 3 February 2010

तुम जब याद आते हो

तुम जब याद आते हो
तो रुलाते हो
जब याद नहीं आते
तो सताते हो
आखिर क्यूँ
क्या यही होती है चाहत
क्या यही प्रेम कहलाता है
अगर है यही प्रेम
तो है कडवा मगर बड़ा प्यारा
खुसनसीब हैं वों जो पीते हैं इस प्याले को
हो जाते हैं अमर
कर जाते हैं अमर
जो पीते हैं इस प्याले को

11 comments:

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत, रोमांटिक, भावपूर्ण और दिल को छू लेने वाली रचना लिखा है आपने! इस उम्दा रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

RaniVishal said...

Bahut bhadiya likha hai aapne....Badhai!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया!

संदीप कुमार said...

सुंदर मनोभाव है, बहुत अच्‍छा लगा पढकर, पुरानी यादें ताजी हो गई

sunil gajjani said...

shandar hai , aao ki lekhani ko sadhuwad , yahi kamna har bar karte hai.

sunil gajjani said...

shandar hai, bahut khoob. oonda lekhani ke liye

निर्मला कपिला said...

सुन्दर रचना होली की हार्दिक शुभकामनायें

अल्पना वर्मा said...

Bahut sundar kavita hai.
bhaavon ko shbdon mein bandhna hi to kavitayee hai.

अल्पना वर्मा said...

Aap ko aur aap ke parivar mein sabhi ko Holi ki shubhkamnayen.

संजय भास्कर said...

Bahut sundar kavita hai.

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।