Wednesday, 25 March 2009

मंजिल की विसात ही क्‍या

मंजिल ही रही अब कोई
रास्ता भी मैं भटक गया
सोचा था साथ दे देंगे मेरे कदम
चलेंगे मेरे साथ दूर तलक
मिल जाएगी मंजिल
होगी आसान डगर
कदम ही मेरा साथ छोड गए
तो मंजिल की विसात ही क्या

अब अपनों ने मुंह फेर लिया
दुनिया का भरोसा क्या करना
जब दोस् ही दुश्मन बन गए
तो गैरों की बात ही क्या करना
किससे कहना किसको सुनना
है तकदीर का ये फसाना
कदम ही मेरा साथ छोड गए
तो मंजिल की विसात ही क्या

की थी कोशिश पकड उंगली चलने की
चला था कुछ दूर साथ उनके
छोड बीच राह में अकेले
चले गए मेरी उंगली थामने वाले
जब उंगली ने ही साथ छोड दिया
तो थामने वालों की बात ही क्या
कदम ही मेरा साथ छोड गए
तो मंजिल की विसात ही क्‍या

19 comments:

Dev Vyas said...

Achha hai Mohan ji....
Likhate rahiye....
Shubhkamnaye..

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत बेह्तरीन दर्द भरे जज्बात।

प्रकाश बादल said...

मोहन भाई कौन कहता है कि आपको लिखना नहीं आता आप बहुत अच्छा लिख रहे हैं, ऐसे ही लिखना जारी रहा तो आपकी रचनाओं का ये निखार सबकी जान ले लेगा, लिखना जारी रखियेगा। आपकी कविता बहुत अच्छी लगी।

MANVINDER BHIMBER said...

bahtreen bhaaw hai.....dil ko chu gae

अल्पना वर्मा said...

poora page black aur us par girati snow ke alawa kuchh nazar nahin aa raha hai.
sirf red colour mein title nazar aa raha hai.matter nahin.
kripya check kar lijeeye

राज भाटिय़ा said...

अरे मोहन बाबू बहुत ही सुंदर कविता लिखी आप ने धन्यवाद

creativekona said...

मोहन जी ,
इतनी अच्छी कविता ..और एपी कहते है लिखना नहीं आता ...कमाल हैऔर पेज से छेड़छाड़ की आदत तो अच्छी है .....कम से कम लिखा हुआ बेहतर तो दिखने लगता है
अच्छी कविता ..बधाई
हेमंत

बी एस पाबला said...

भावाभियक्ति अच्छी लगी

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति दी है ... आपने अपने भावों की।

श्यामल सुमन said...

बहुत खूब। कहते हैं कि-

मंजिल उसी को मिलती है जिसके सपनों में जान होती है।
सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता हौंसल से उड़ान होती है।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

seema gupta said...

" manjilo ko pane ka accha pryass hai...sunder bhav"

regards

मोहन वशिष्‍ठ said...

सर्वप्रथम आप सभी का मेरे ब्‍लाग पर स्‍वागत है। बस कहते हैं ना कि अगर खुशी को बांटो तो बढती है गमों को बांटो तो कम होते हैं इसलिए अपने दिल का हाल आप सभी के सामने रखा है आशा है आप सभी मेरी उंगली ऐसे ही थामे रखेंगे
बहुत बहुत धन्‍यवाद आप सभी का

SWAPN said...

sunder rachna.

Harkirat Haqeer said...

मंजिल ही न रही अब कोई
रास्ता मै भटक गया
सोचा था साथ दे देगें मेरे कदम
चलेगें मेरे साथ दूर तलक
मिल जायेगी मंजिल
होगी आसान डगर
कदम ही मेरा साथ छोड़ गए
तो मंजिल की बिसात ही क्या ....

वाह जी ऐसा क्यों...?

ये किस मुकाम पे पहुंचा दिया ज़माने ने
की अब हयात पे तेरा भी इख्त्यार नहीं......!!

Tarun said...

Prakash badal kI baat se sehmati

Mumukshh Ki Rachanain said...

भाई मोहन जी,

कदम ही नहीं हम भी आपके साथ रहेंगे, मंजिले भी मिलेगी पर अफ़सोस कि तब ऐसे सुन्दर गीत न मिलेगें.......

सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
अब तो आप को लग रहा है न कि आपके साथ कितने लोग हैं, लगे रहिये................


चन्द्र मओहन गुप्त

Prem Farrukhabadi said...

bahut achchhi lagi aapki rachnaaur aapka blog. badhaai.

Shama said...

Mohanji,
Maine pehelebhee aapka blog padha tha...jab profile me dekha likha hua," mujhe likhnaa nahee aata," to mai tippanee likhnese dar gayee....!Gar aap aisee rachnaonko ke baavjood aisaa likhenge, to meree jaiseee, nihaayat hee adnaa-see wyakti kya kahe?Jise sachme likhika hai naa kavi..?
Mere "kahanee" blogpe tippaneeke liye behad shukrguzar hun...zarranawaazee kee hai aapne...
Pooree kahanee hazir hai....use apne pehle blog se copy kar, is sirf kathaon ke liye banaye blogpe daal rahee thee...aap padh sakte hain...mujhe khushee hogee...

Babli said...

बहुत खूब! क्या बात है! अच्छी पेशकश!