Tuesday, 11 November 2008

मैं क्‍या हूं...

बहुत दिनों से ब्‍लाग से मेरा संपर्क नहीं हो रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे शरीर के किसी अंग ने काम करना ही बंद कर दिया। बहुत तकलीफ होती थी। जब सोचता था कि इतने दिनों तक की जुदाई आखिर कैसे सही है मैंने। बताने के लिए मेरे पास शब्‍द नहीं हैं। आज कुछ लिखने का काफी मन बन गया और सोचा चाहे आज कुछ भी हो जाए एक पोस्‍ट तो लिखूंगा ही लेकिन जैसे ही मेल चैक की तो उसमें बहुत ही महान ब्‍लागरों की मेल देखी जिसमें लिखा था कि आगे भी बढो। पढकर एकबारगी तो सोचने पर मजबूर हो गया कि ब्‍लाग के पहले मैं क्‍या था और आज महान महान विद्वान मुझे आशीर्वाद दे रहे हैं और मुझे आगे बढने के लिए कुछ लिखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मेरी खुशी का ठिकाना ही ना रहा क्‍योंकि अब मैं अकेला नहीं हूं। आज ना लिख पाने के लिए क्षमा चाहता हूं लेकिन कल से अवश्‍य इस ब्‍लाग को नियमित कर लूंगा। बस आप सभी का यही आशीर्वाद की कामना करता हूं। बस ये चार लाईने जैसे ही जहन में आई तो इन्‍हीं चार लाईनों को सांझा कर रहा हूं ...

सोचता हूं आज मैं

क्‍या था कुछ दिनों पहले मैं

शायद किसी कवि की रचना

के किसी शब्‍द की मात्रा का

सौंवा भाग भी नहीं हूं मैं

शायद किसी रेगिस्‍तान के

रेत के एक कण के माणिद भी नहीं हूं मैं

कोई बताए मुझे

मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं

11 comments:

PN Subramanian said...

चलो तंद्रा तो टूटी. लिखते रहिए. आभार.
http://mallar.wordpress.com

ताऊ रामपुरिया said...

कोई बताए मुझे
मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं

बहुत बढिया भाई ! आपका इन्तजार रहता है ! शुभकामनाएं !

Udan Tashtari said...

हम बताये देते हैं..आप एक अच्छे इन्सान हैं और इसीलिए सब इन्तजार कर रहे हैं. कल से नियमित होने के लिए शुभकामनाऐं.

रंजना said...

sameer bhai se sahmat hun.
likhte rahen....shbhkaamnayen.

राज भाटिय़ा said...

भाई इन्तजार रहे गा आप के लेख का

seema gupta said...

शायद किसी रेगिस्‍तान के
रेत के एक कण के माणिद भी नहीं हूं मैं
कोई बताए मुझे
मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं
" apne aap se shee prshan kiya hai, or ye prashan sbhee ke mun mey ubhrta hoga.... magar jvab shayad ...." aapke lekh ka intjar rhega..

Regards

विनय said...

बड़े दिन बाद दर्शन हुए मित्र, हृदय को जैसे धड़कन मिल गयी!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

लिखते रहे हम तो यही कहेंगे जी ...

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

शायद किसी रेगिस्‍तान के
रेत के एक कण के माणिद भी नहीं हूं मैं
कोई बताए मुझे
मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं.
Bahut badhiya rachana . bhai nirantar jari rahe. dhanyawad.

अल्पना वर्मा said...

sahi likha hai...blogging bhi ek nasha hai --
शायद किसी रेगिस्‍तान के
रेत के एक कण के माणिद भी नहीं हूं मैं
कोई बताए मुझे
मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं मैं क्‍या हूं.
is ka uttar to shayad har koi khud mein dhuundh raha hoga...

Job Search in India said...

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