Sunday, 19 October 2008

हो गया आशिक का सर्वर शट डाऊन....

कल जब मिले थे
तो दिल में हुआ एक साऊंड
और आज मिले तो कहते हैं
यूअर फाईल नोट फाऊंड

जो मुददत से होता आया है
वो रिपीट कर दूंगा
तू नहीं मिली तो अपनी जिंदगी
कंट्रोल आल्‍ट डिलीट कर दूंगा

शायद मेरे प्‍यार को
टेस्‍ट करना भूल गए
दिल से ऐसा कट किया
कि पेस्‍ट करना भूल गए

लाखों होंगे निगाह में
कभी मुझे भी पिक करो
मेरे प्‍यार के आइकन पे
कभी तो डबल क्लिक करो

रोज सुबह हम करते हैं
प्‍यार से उन्‍हें गुड मार्निंग
वो ऐसे घूर के देखते हैं
जैसे जीरो एरर और पांच वार्निंग्‍स

ऐसा भी नहीं है कि
आई डोंट लाईक यूअर फेस
पर दिल के स्‍टोरेज में
नो मोर डिस्‍क स्‍पेस

घर से जब तुम निकले
पहने के रेशमी गाऊन
जाने कितने दिलों का
हो गया सर्वर शट-डाऊन

23 comments:

भूतनाथ said...

शायद मेरे प्‍यार को
टेस्‍ट करना भूल गए
दिल से ऐसा कट किया
कि पेस्‍ट करना भूल गए

बढिया कट पेस्ट किया ! :) नई और रोचक कविता ! धन्यवाद !

ताऊ रामपुरिया said...

घर से जब तुम निकले
पहने के रेशमी गाऊन
जाने कितने दिलों का
हो गया सर्वर शट-डाऊन

बहुत रोचक रचना ! शुभकामनाएं !

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

जो मुददत से होता आया है
वो रिपीट कर दूंगा
तू नहीं मिली तो अपनी जिंदगी
कंट्रोल आल्‍ट डिलीट कर दूंगा

bahut hi umda rachana ek naye andaaj me . dhanaywad.

राज भाटिय़ा said...

वाह क्या कविता है, लगता है आज के आशिको पर लिखी गई है, मजा आ गया
धन्यवाद

मोहन वशिष्‍ठ said...
This comment has been removed by the author.
neeshoo said...

मोहन जी क्या खूब लिखा आपने । अच्छा लगा ।

विनय said...

इस कम्प्यूट्रिकृत रचना के लिए बधाई स्वीकारें।

makrand said...

घर से जब तुम निकले
पहने के रेशमी गाऊन
जाने कितने दिलों का
हो गया सर्वर शट-डाऊन
bahut umda
regards

शायदा said...

no more disc space..

betuki@bloger.com said...

मोहन जी, ऐसा कभी-कभी होता है। मोबाइल पर सही नम्बर डायल करने के बाद भी आता है प्लीज चैक द नम्बर। कभी ऐसा भी होता है जब नम्बर किसी का मिलाओ और बात कहीं हो जाती है। अगर सर्वर डाउन है तो कुछ भी हो सकता है।

Udan Tashtari said...

वाह, यह भी खूब अंदाज है-बढ़िया प्रयास. बधाई.

seema gupta said...

घर से जब तुम निकले
पहने के रेशमी गाऊन
जाने कितने दिलों का
हो गया सर्वर शट-डाऊन
" ha ha ha ha ha wah, ab kee baar to sach mey kmal ho gya, ek alag hee andaaj mey nazar aaye aap... or han 'Tanishk' ko blog pr dekha, thanks a lot..."

Regards

shyam kori 'uday' said...

लाखों होंगे निगाह में
कभी मुझे भी पिक करो
मेरे प्‍यार के आइकन पे
कभी तो डबल क्लिक करो
... सुन्दर रचना है।

sachin said...

hi dear friend,
how r u?
pls visit this blog for great information..

http://spicygadget.blogspot.com/.

thank you dear
take care..

योगेन्द्र मौदगिल said...

मोहन जी,
आपकी टिप्पणी ने अभिभूत की दिया
क्या बात है भाई....
इधर आपके ब्लाग पर आया तो एक बढ़िया सामयिक हास्य से परिपूर्ण रचना मिली

साधुवाद स्वीकारें.....

वर्षा said...

what a poem sir ji

मनुज मेहता said...

शायद मेरे प्‍यार को
टेस्‍ट करना भूल गए
दिल से ऐसा कट किया
कि पेस्‍ट करना भूल गए

लाखों होंगे निगाह में
कभी मुझे भी पिक करो
मेरे प्‍यार के आइकन पे
कभी तो डबल क्लिक करो


bahut khoob janab, bahut umda, maza aa gaya

रंजना said...

वाह ! क्या बात है.लाजवाब स्टाइल है.कम्पूटर युग का कम्प्यूटरीकृत प्रेम ..........बहुत बहुत सुंदर....अनूठा भाषा प्रयोग है.

hindustani said...

बढ़िया प्रयास. बधाई.कभी आप मेरे ब्लॉग पर भी आए

शिवराज गूजर. said...

बहुत बढ़िया मोहन जी मजा आ गया. वक़्त के हिसाब से सटीक रचना वो भी मजेदार.
शिवराज गूजर

singhsdm said...

हिन्दी और अंग्रेज़ी की घालमेल वाली कविता मजेदार थी. दोनों भाषाओँ को जोड़कर काफी ह्यूमरस कविता लिखी.आगे भी मोहन का मन ऐसे ही कुछ लिखता रहे......शुभकामनाएं

hindustani said...

सभी जानना चाहते हैं कि हिन्दुस्तानी ब्लॉग पर फिरंगी क्या कर रहा है ? मैं इस सवाल का जवाब देना चाहूँगा कि हिन्दुस्तान में हिन्दुस्तानियों से ज्यादा महत्व विदेच्चियों को दिया जाता है। तभी तो मनमोहन के बयान से ज्यादा लोग बुच्च के बयान को सुनना चाहते हैं। और एक बात जब से मैंने अपने ब्लॉग पर फिरंगी की फोटो लगाई है तभी से मेरे हिन्दुस्तानी साथी मेरे ब्लॉग पर आने लगे हैं। फिरंगी की तस्वीर लगाने के पीछे मेरा और कोई दूसरा मकसद नहीं है यदि आप लोगों को एतराज है तो मैं इसे अपने ब्लॉग से हटा दूँगा।

hindustani said...

आप मेरा समय बदल रहा है लेख पढ़े और अपने विचार दें।