मोहन का मन
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Sunday, 30 August 2009
अधखिला फूल
आज फिर बारिश हुई
सबके चेहरे खिले
फूल खिले
पेड खिले
खिला नवयौवन भी
बस, नहीं खिला तो
एक फूल
जो अभी अधखिला था
गिर गया
इस बारिश से
और फिर वो अधखिला फूल
समा गया
पानी के आगोश में
और बह गया दूर
बहुत दूर
पानी के आगोश में
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